कभी-कभी शब्द
माला के मोतियों-से बिखर जाते हैं,
पिरोना चाहते हैं उन्हें,
पर समझ नहीं आता—
कौन-से मोती
सजाने लायक हैं
माला के मोतियों-से बिखर जाते हैं,
पिरोना चाहते हैं उन्हें,
पर समझ नहीं आता—
कौन-से मोती
सजाने लायक हैं
आप ही बताएं : Which one i should go with
कुछ
अजीब-सा चलता
रहता है ये दिल, न
जाने किस ज़िद में भटकता
रहता है ये दिल कब
तक इसे
समझाना होगा? आख़िर
कब तक इसे
मनाना होगा? उम्र
का ख़याल अब
तो कर ले— बालों
की सफ़ेदी में ख़्वाहिशों
का गजरा हर
बार खुशबू
नहीं देता
|
कुछ
अजीब-सा चलता
रहता है ये दिल, न
जाने किस ज़िद में भटकता
रहता है ये दिल कब
तक इसे
समझाना होगा? आख़िर
कब तक इसे
मनाना होगा? उम्र
का ख़याल अब
तो कर ले— बालों
की सफ़ेदी में ख़्वाहिशों
का गजरा हर
बार खुशबू
नहीं देता
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kuch ajeeb sa
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