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रविवार, 18 सितंबर 2022

मुखौटा - Mask - Part 3

Part 1 : मुखौटा - Part 1

Part 2 : मुखौटा - The Mask


Part - 3


 - 5 -


"सुजाता, कौन तंग करता है तुम्हें, मुझे नहीं बताओगी". 

सुजाता, ये आवाज़ पहचानती थी, आवाज़ सुनते ही वो झेंप गयी,'नहीं ऐसा नहीं हो सकता, वो वापस नहीं आ सकता, मैंने उसे ख़तम कर दिया था', सुजाता कुछ समझ नहीं पा रही थी .

"मेरे तरफ देखो सुजाता, मुझे नहीं पहचानती तुम, कितना प्यार करता हूँ मैं तुम से, और अब तक करता हूँ, एक बार देखो न मेरी तरफ".

सुजाता ने चेहरा अपने हाथों में छुपा रखा था, 'नहीं-नहीं शरद वापस नहीं आ सकता, शरद को तो मैंने".

"सुजाता, ऑंखें खोलो और देखो" माँ ने कहा "तुम, भगवान् नहीं हो किसी को मिटा दोगी, देखो सुजाता" शायद अपनी करनी पर कुछ शर्मिंदगी हो.

सुजाता ने पलट कर देखा तो कुमार उसके सामने खड़ा था, "मेरी आँखों में देखो, पहचानो मुझे, मुझे लगा तुम मुझे एक पल में पहचान लोगी, पर शायद मेरे ही प्यार में कोई कमी रह गयी थी, एक पल क्या तुम मुझे पिछले एक साल से भी न पहचान पायी".

"कुमार, नहीं - नहीं तुम तो शरद हो, पर तुम को तो" सुजाता कांप रही थी,"तुम शरद ही हो, कैसे न पहचान पायी तुम्हें मैं" .



- 6 -


"शायद तुम्हारी आँखों पर पैसों की पट्टी बंधी थी, कैसे भूल गयी मुझे" शरद, सुजाता के हाथ अपने हाथों में लिए सवाल कर रहा था, "क्या हुआ था उस दिन, मैं पहाड़ से कैसे गिर गया था, और तुम कहाँ थी, तुम्हें तो कोई चोट नहीं आयी थी न" शरद बहुत प्यार से बोल रहा था.

"पहाड़ से गिर गए थे ?, पर सुजाता ने तो बोला की तुम ऑस्ट्रेलिया चले गए हो, फिर ये पहाड़ कहाँ से बीच में आ गया, कोई मुझे भी बताएगा हुआ क्या था ?" नीमा कुछ समझ नहीं पा रही थी, बहुत ही उलझन में थी.

"सुजाता, नीमा कुछ पूछ रही है, तुम बताओगी या ये काम मुझे ही करना होगा ?" माँ ने सुजाता से पुछा.

"माँ, तुम भी सब जानती हो, पर मुझे टोका क्यों नहीं, कुछ समझाया क्यों नहीं" सुजाता अब सब और से घिर गयी थी, वो समझ नहीं पा रही थी क्या करे और क्या कहे. 

"कभी-कभी, बात समझाने से भी समझ नहीं आती और तुम, तुम तो सातवें आस्मां पर थी, तुम पर समझाना काम कहाँ आता, तो ये सब होना ही था" माँ ने कहा .

"सही कह रही हो, माँ, मैं सातवें आस्मां पर ही थी, समझाने से कहाँ समझती मैं, तो ये सब होना ही था, शरद, मैंने ही तुम्हारी ड्रिंक में नींद की गोलियां डाली थी, और वो मैं ही थी जिसने तुम्हें पहाड़ से धक्का दिया था, शायद मैं तुम्हारे प्यार से तंग आ गयी थी, हद से अधिक ही प्यार किया था तुमने मुझे, बस वही सब रास नहीं आया, कुछ और पाने की तमन्ना मुझे न जाने किस रास्ते पर ले गयी, तुम कुमार बन कर आये तो भी मैं अपने नशे में थी तुम्हें पहचान नहीं पायी" सुजाता एक खाली-पन में देख कर बोल रही थी .

"इतना सब हो गया और मुझे किसीने कुछ नहीं बताया, पर शरद तुम कुमार कैसे बन गए !" नीमा ने पुछा.
शरद के बोलने से पहले सुजाता ही बोल पड़ी "मैंने शरद को पहाड़ से फेकने से पहले उसके ऊपर तेज़ाब फेंक दिया था, ताकि मरने पर उसे कोई पहचान न पाए, और मेरा गुनाह, कोई जान न पाए  न जाने मैंने वो सब क्यों किया और कैसे किया, आज भी सोच कर लगता है, मैंने वो किया या वो सब मेरे दिमाग की सोच है, माँ, तुम ठीक कह रही हो, समझाने से कैसे समझती मैं ये सब, कुछ और पाने की चाह ने मुझसे न जाने क्या-क्या करवा दिया" सुजाता अभी भी खाली-पन मैं ही देख कर बोल रही थी.

"सुजाता........" शरद कुछ कह पाता, इससे पहले पुलिस वह आ पहुंची.

"पुलिस, पुलिस क्यों, यहाँ इनका क्या काम" नीमा थोड़ा डर गयी थी.

"मैने फ़ोन किया है, मेरा गुनाह, सज़ा के काबिल ही है, और किसी में कहाँ इतनी हिम्मत की मुझे कुछ कह पाए, चुप न करवा दूंगीं" सुजाता, शरद को देख मुस्कुराई और पुलिस की और बड़ चली.

"सुजाता, तुम्हारे गुन्हा की सज़ा मैं ही दुँगां, क्यूंकि पीड़ित मैं ही तो हूँ" शरद ने अपनी जेब से अंगूंठी निकाल कर सुजाता को पहना दी, "अब कहाँ जाओगी, अब कहीं मत जाना, मैं शादी की तैयारी करूँगा, अब लौट कर मेरे पास ही आना, आओगी न सुजाता ?".

"और कहाँ जाऊगीं, तुम्हारे जैसा प्रेम मुझे करेगा कौन ?" सुजाता शरद के गले लग गयी. 

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शुक्रवार, 29 जुलाई 2022

अजीब सा फैसला Part - 3

 

भाग २ : https://tejinderkkaur.blogspot.com/2022/07/best-hindi-story.html

भाग ३ 

- 10 -



'माँ भी मुझे अकेला छोड़ चली गयी, अब क्या, मेरी कहानी कैसे आगे बढ़ेगी, अभिनव की बात लग गयी शायद, न मैं अभिनव की हो सकी और न ही अनंत को अपना बना सकी' नेहा कैफ़े में बैठी अपनी ज़िन्दगी का हिसाब किताब लिख रही थी.

"नेहा? नेहा......, क्या बात है, ये तो नेहा ही है" नेहा ने देखा अभिनव उसके सामने खड़ा था .

"कैसी हो, कहाँ हो, क्या चल रहा है" अभिनव ने बड़े उत्साह से पुछा .

"मैं ठीक, तुम कैसे हो ?" नेहा ने धीरे से पुछा. 

"नेहा, तुम ठीक तो हो, वो नेहा कहाँ गई, जिसके चेहरे से गुरुर झलकता था"? अभिनव ने चिंता जताते बोला, "माँ कैसी हैं?".

"अच्छी ही होंगीं, मुझसे और सबसे दूर जा कर" नेहा ने हलकी आवाज़ में जवाब दिया.

"ओह, बहुत अफ़सोस है, मैं अभी जल्दी में हूँ, तुमसे मिलता हूँ फिर" अभिनव बोल कर चला गया .

अभिनव भांप गया की नेहा अभी बात करने की स्थिति में नहीं है, और उसे वहां से जाना ही बेहतर लगा.


- 11 -


दरवाज़े की घंटी ने नेहा की नींद खोल दी, 'कौन आया होगा'.

"ओह तुम, तुम्हें इस घर का पता कैसे चला" दरवाज़े पर अभिनव था.

"सारे सवालों के जवाब यही देने होंगें क्या?, अंदर आने को नहीं कहोगी ?" अभिनव ने प्यार से पुछा. 

"अरे, आओ न, अंदर आओ, मैं पानी लाती हूँ" नेहा बोल कर रसोई घर में चली गई. 

'अब, मैं इससे क्या बात करूँ' नेहा सोचते-सोचते अभिनव के लिए पानी ले गयी.

"कैसी हो, अब बताओ, क्या चल रहा है, बच्चे-वच्चे कितने हैं" अभिनव ने नेहा से पुछा.

"मैं ठीक हूँ, बच्चे हुए ही नहीं, और नौकरी चल रही है, और मैं तुम्हारे सामने हूँ" नेहा ने कहा.

"नेहा, मैं अनंत से मिला था, वो किसी और के साथ था, अब तुम अपनी कहानी बताओ " अभिनव ने चिंता जताते पूछा.

"अनंत जो कर रहा है वो उसकी ज़िन्दगी है, और ये मेरी, मुझे बस इतना पता है की मैं अपनी ज़िन्दगी में खुश हूँ और वो अपनी, बस इतनी सी ही बात है"नेहा ने बात को खत्म करते हुए कहा.

"ठीक है मान लिया, पर तुमने उससे शादी क्यों की, मुझे इस बात की समझ आज तक नहीं आयी" अभिनव ने नेहा से पूछा. 

"मैंने कभी सोचा नहीं, जो हुआ वो क्यों हुआ" नेहा ने बात को खत्म करते कहा.

"नेहा, कब तक खुद को और अनंत को तंग करती रहोगी, उसे आज़ाद कर दो और खुद भी आज़ाद हो जाओ" अभिनव ने कहा,"चलने लगो तो रास्ता खुद-बा-खुद मिल जाता है" 

नेहा कुछ बोल पाती इतने में दरवाज़े की घाटी बजी, 'कौन होगा अब' नेहा सोचते हुए दरवाज़े की और बढ़ चली

"जी, आप, ही नेहा हैं?" दरवाज़े पर डाकिया था, नेहा ने पैकेट वहीँ रखा और वो अभिनव के लिए चाय बनाने चली गयी," चाय तो पिओगे न, मैं बना लाती हूँ".

"नेहा, ये कैसे कागज़ कैसे हैं, खोल कर तो देखो? अभिनव बोला.

नेहा चाय बना लायी, तो देखा अभिनव ने डाक का लिफाफा खोल कागज़ निकाल लिए थे .

"लो बई नेहा, तुम्हारी आज़ादी का फरमान आ गया है" अभिनव ने कागज़ नेहा की और बढ़ा दिए.

तलाक के कागज़ देखते नेहा ने कहा "बड़ी देर कर दी, ख़ैर छोड़ो, तुम अपनी कहानी बताओ" नेहा ने अभिनव से पुछा .

"नेहा, मुझे पता है तुम बहुत strong हो पर, मेरी ये मजबूरी है की  मेरी कहानी तुमसे शुरू हुई थी और तुम पर ही ख़त्म होना चाहती है" अभिनव ने नेहा से कहा. 

"अब, तुम जा सकते हो, तुम्हारे साथ मेरी कहानी बन नहीं सकी, और अब बन भी नहीं सकती, वक़त निकल गया है, मेरी कहानी में अनंत एक ठहराव है और वो वही रहेगा बस, हमेशा"

अभिनव चुप-चाप उठ कर चला गया.


- 12 - 


अभिनव के जाते ही अनंत आ गया,"तो अब तुम अपनी कहानी को भी वापस दुबारा से लिख रही हो, मुझे ख़ुशी है इस बात की" 

"अनंत, मैंने अपनी कहानी अपने-आप लिखी है, और उस कहानी में तुम हो और तुम ही रहोगे, हाँ, तुम अगर नहीं रहना चाहते, तो बात अलग है" नेहा ने सर नीचे कर सब बोल दिया.

"नेहा, तुम्हारी और मेरी कहानी अब एक नहीं हो सकती, क्यूंकि, क्यूंकि, मेरी कहानी में अब एक ज़िम्मेदारी आ गयी है" अनंत ने मेज़ पर रखे कागज़ नेहा की और बढ़ा दिए.  

नेहा ने कागज़ पर हस्ताक्षर कर कागज़ अनंत की और बढ़ा दिए, "BestOf Luck, अब तुम जा सकते हो" नेहा, अनंत की और पीठ कर खड़ी रही.

"नेहा, मुझे.............! "

"अनंत, अगर तुम ड्रामा करना चाहते हो, तो please मेरे पास energy नहीं है, Please leave" नेहा ने अनंत को अपनी बात भी पूरी नहीं करने दी, और उसे जाने को कह दिया. 

'अनंत, तुम्हारी एक ज़िमेदारी मेरे पास भी है अब, अब इस ज़िमेदारी को मुझे अकेले ही पूरा करना होगा' नेहा अपनी बात भी न कह पायी, और अनंत के जाने की आहट उसके रोम-रोम में गूंजने लगी.

'अकेले ये सब कैसे होगा, क्या मैं अनंत को बता दूँ, नहीं फिर तो वो बहुत परेशान हो जायेगा, अभिनव, नहीं-नहीं ये ठीक नहीं है, नहीं-नहीं न अनंत और न अभिनव, अब ये मेरी प्रॉब्लम है, अभिनव ने ठीक ही कहा की मैं स्ट्रांग हूँ, अब मेरे पास ज़िन्दगी जीने का एक बहुत हसीं कारण भी है.मैंने अपनी ज़िन्दगी अपने तरीके से जी है और आगे भी मैं ही अपनी ज़िन्दगी की रचना करूंगीं' नेहा मुस्कुराते हुए चाय की चुस्की लेने लगी'





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शनिवार, 23 जुलाई 2022

अजीब सा फैसला Part - 2

 

 भाग १ :https://tejinderkkaur.blogspot.com/2022/07/part-1-hindistory.html


भाग २ 


- 6 -

"नेहा कहाँ है" पारुल ने अनंत से पुछा.
"जी, मुझे नहीं पता, शायद लेट हो गयीं है" अनंत ने सादगी से जवाब दिया. 
"ठीक है, जैसे ही आ जाये, उसे कहना, डायरेक्टर सर बुला रहें है" पारुल बोल कर चली गयी.
पारुल के जाते ही नेहा भी आ गयी.
"हाँ, बई कैसे हो, और वो खास दोस्त कैसा है?" नेहा ने चुटकी लेते पुछा.
"जी, वो ठीक है, पारुल मैडम आयी थी, आपको डायरेक्टर सर बुला रहें है, पारुल जी अभी-अभी यहाँ से गयी है" अनंत ने जल्दी-जल्दी सब बोल दिया.
"ओह, ओके, मैं अभी आती हूँ, तुम वो फाइल निकालो जो मैंने तुम्हें शुक्रवार को दी थी" नेहा बोल कर चली गयी, अनंत फाइल खोजने में जुट गया. 
"लो जी, सामान बांधो फिर से, शुक्र है अभी आ गया ये टूर, बाद में जाना ही न हो पाता, और ये काम हाथ से निकल जाता" नेहा ने एक सांस में सब बोल दिया. 
"अच्छा, देखो मुझे तीन-चार दिन के लिए जाना होगा, यहाँ का काम तुम संभालोगे, और हाँ मुझे फ़ोन पर अपडेट देते रहना" नेहा फाइल के पने पलटते बोल रही रही थी. 

"क्या मैं भी आपके साथ चल सकता हूँ?" अनंत ने नेहा से पुछा. 
"तुम, तुम सही में जाना चाहते हो?, ठीक है, डायरेक्टर सर तो बोल ही रहे थे, चलो ठीक है, तुम भी चलो फिर" नेहा ने अनंत को बोला. 

- 7 - 


नेहा कैब मैं बैठी अनंत का इंतज़ार कर रही थी.
"यहाँ अकेले रहते हो" नेहा ने अनंत से पुछा. 
"जी नहीं, roomates भी हैं" ओह ओके, बहुत बढ़िया" नेहा आँखें बंध कर आराम से बैठ गयी, "अच्छा सुनो, मुझे शायद वहां समय न मिले पर, तुम समय निकाल कर घूमने ज़रूर जाना, बहुत बढ़िया जगह है. 

दो दिन काम करते ही बीत गए, तीसरे दिन अनंत के ज़िद करने पर नेहा सुबह-सुबह तैयार हो गई और दोनों पैदल ही सैर पर निकल गए.
"तो, गर्ल फ्रेंड का क्या हाल है, क्या करती है वो" नेहा ने पुछा.
"गर्ल फ्रेंड नहीं है अभी, कोई ऐसा मिला ही नहीं" अनंत ने भोला सा मुँह बना कर बोला.
'स्मार्ट, उस दिन restaurant में किसके साथ थे फिर, ख़ैर छोड़ो, "अच्छा, चलो वापस चलें" नेहा उठ कर जाने लगी तो अनंत ने उसका हाथ पकड़ लिया, "रुकिए न, यहाँ बहुत बढ़िया नाश्ते वाला है, जो फ्रेश नाश्ता बनाता है, चलिए न वहां चलते हैं" अनंत, नेहा का हाथ छोड़ दूकान की ओर चल दिया. 

'ये.....  क्या हुआ अभी' नेहा बिना कुछ कहे ही अनंत के पीछे-पीछे चल दी. 
"अरे, साहब तो आप आ गए, यही हैं क्या वो, आज मैंने आपके कहे अनुसार गोभी के परांठे बनाये हैं" दुकानदार ने अनंत को देखते बोला.

"तो ये प्लानिंग कब से चल रही है, मुझे यहाँ लाने की, और तुम्हें कैसे पता चला की मुझे गोभी के परांठे पसंद हैं" नेहा ने चुटकी लेते बोला. 
"नेहा जी, आप इतने लगन और धैर्य से मुझे काम सीखा रही हैं तो मेरा इतना तो फ़र्ज़ बनता ही है की मैं आपके लिए भी कुछ करूँ !" अनंत ने नेहा को परांठे की प्लेट पकड़ाते बोला.

- 8 - 

आज सुबह की सैर के बाद नेहा ने अनंत से कोई बात नहीं की.
'न नेहा शाम की चाय के लिए आयी और न ही रात के खाने पर, क्या हुआ होगा, कहीं मुझसे नाराज़ तो नहीं !' अनंत सोचते हुए अपने कमरे की ओर बढ़ चला, रास्ते में देखा तो नेहा स्विमिंग पूल में थी, "नेहा, कहाँ थी आप, मैं सारा दिन आपको ही को खोज रहा था".
"एक दिन और रुक जाएँ तो कोई एतराज़ तो नहीं है न" नेहा, अनंत को देखे बिना बोला.

अनंत के जवाब न देने पर नेहा ने मुड़ कर देखा तो अनंत उसके पीछे खड़ा था, अनंत की उँगलियाँ, नेहा के हाथों  को जकड़ रही थी, नेहा ने आज से पहले कभी ऐसा महसूस नहीं किया था, नेहा के तन-बदन में एक नयी सी लहर दौड़ने लगी, उसके रोम-रोम में अनंत का एहसास दौड़ने लगा, अनंत के अघोष में नेहा पूरी तरहं पिघल सी गई
"नेहा, ये सब पहले क्यों नहीं बताया" अनंत ने धीरे से बोला, अनंत आगे कुछ न बोल पाया और रात यूँ ही बीत गई.

अगले दिन सुबह अनंत की आँख खुली तो नेहा उसके पास ही तैयार हुई बैठी थी, "आपने कल कहा था की हम आज नहीं कल जायेंगें, तो सो जाइये" अनंत ने नेहा के बाल सहलाते बोला.
"चलो, तैयार हो जाओ जाना है" नेहा ने अनंत की बात का जवाब नहीं दिया. 
"पर, इतनी सुबह जाना कहाँ है" अनंत ने नेहा को अपनी और खींचते बोला.
"शादी करने" नेहा ने अनंत की आँखों में आँखें डाल धीरे से बोला बोला.

- 9 -


"क्यों किया तुमने ऐसा नेहा, क्या तू, सच में किसी से नहीं डरती ?" माँ ने आसूं पोंछते पुछा  
दरवाज़े की घंटी बजी तो माँ कांप गई, "क्या हुआ माँ, क्यों डर गई, दरवाज़े की घंटी ही तो बजी है, मैं देखती हूँ कौन आया है, शायद अनंत हो".
"उसे अभी जाने को कह दो, मुझे नहीं मिलना उससे, सारी मुसीबत की जड़ ही वो है, ना वो तेरी ज़िन्दगी में आता, और न ये सब होता" माँ ने गुस्से में बोला. 
"माँ, क्या ये सब उसी की गलती है क्या, बस करो प्लीज, वो बहुत अच्छा है, ऐसा मत बोलो" नेहा दरवाज़ा खोलने चली गई. 
दरवाज़े पर अभिनव था,"ओह, तुम तो यहीं मिल गई, मैंने सोचा तुमसे बात करने के लिए तुम्हारे हनीमून से आने का इंतज़ार करना होगा".
"जब सब पता चल ही गया तो यहाँ किस लिए आये हो" नेहा ने सोफे पर बैठते बोला. 

"देखने आया हूँ की मेरे प्यार का रंग हसीं था या तुम्हारे प्यार का रंग हसीं है" अनंत ने मुस्कुराते बोला,"पर तुम पर तो असमंजस का रंग चढ़ा हुआ है, लगता है तुम अपने फैसले से खुश नहीं हो, तो क्यों किया ऐसा?".
"तुम जा सकते हो, जो बीत गई सो बात गई, मुझे तुमसे और कोई बात नहीं करनी" नेहा दरवाज़े के पास जा कर खड़ी हो गई.
"नेहा, याद रखना किसी का दिल दुखा कर कोई खुश नहीं रहता, पर मैं तुम्हारी ख़ुशी के लिए दुआ करूँगा " अभिनव आँखों में आसूं ले चला गया.
अभिनव के जाते ही दरवाज़े की घंटी फिर से बज गई, नेहा ने खीजते हुए दरवाज़ा खोला,"अब क्या है?"
"अरे, किस पर इतना गुस्सा निकला जा रहा है" अनंत ने मुस्कुराते पुछा.

"कुछ नहीं बस यूँ ही, आओ न, माँ अंदर है" नेहा ने अनंत से कहा. 
"मैं माँ से मिल कर आता हूँ, ओह, ये गिफ्ट-बैग बहार पड़ा था, तुम्हारा नाम है इस पर, शायद कोई तुमसे मिले बिना ही चला गया, शायद जल्दी में था" 
'अभिनव ही होगा' बैग में एक खाली फोटो फ्रेम था और एक कार्ड था, उस पर लिखा था, 'मेरे प्रेम की अधूरी कहानी की तरहं, ये फ्रेम भी अधूरा सा है, अगर तुम्हें अपने प्रेम की कहानी पूरी सी लगने लगे तो इस फ्रेम में अपनी तस्वीर लगा लेना '  

                                                                     to be continued .................

शनिवार, 16 जुलाई 2022

अजीब सा फैसला - Part - 1

 

- 1 - 

"नेहा, ये क्या किया तूने, अब मैं, तेरे ससुराल वालों को क्या जवाब दूंगी, पर, अब वो तेरे ससुराल वाले भी न रहे, तेरी करनी के बाद वो हमसे नाता ही तोड़ लेंगें" नेहा ने जैसे ही माँ को सच बताया माँ समझ न पायी के क्या बोले.

"एक बार मुझसे पूछ तो लेती, तेरे पापा ज़िंदा होते तो सब संभाल लेते, अब मैं ये सब कैसे सम्भालूंगीं, क्या कर दिया नेहा तूने, क्या कमी रह गयी गयी मेरे प्यार में, मेरे प्यार का तूने अच्छा फायदा उठाया, तूने जो बोला मैंने किया, तुझ पर हमेशा विशवास किया, पर इस बदनामी को में कैसे सम्भालूंगी".

"माँ, मैं सब संभाल लुंगी, आप शांत हो जाओ, जो होना था वो हो गया, मैं हूँ न, मैं सब संभाल लूंगीं" नेहा ने माँ को पानी का गिलास देते कहा.


- 2 - 


"नेहा, तुम सच में मुझसे शादी करोगी न ?" अभिनव ने नेहा के बालों को सहलाते पुछा .
"नहीं, मैं तुमसे शादी नहीं करूंगीं" नेहा अभिनव के बगल में ऑंखें बंद कर लेटी हुई थी, और ऑंखें बंद किये ही अभिनव के सवालों के जवाब दे रही थी.
"दिल तोड़ने वाली बातें क्यों करती हो" अभिनव ने प्यार से पुछा. 
"तुम जो बच्चों वाली बातें करते हो उसका क्या, तीन महीने में हमारी शादी होने वाली है, सबको को न्योता जा चूका है, बस कार्ड बांटने बाकी रह गए हैं, और तुम्हारी सुई अभी भी इसी सवाल पर अटकी है" नेहा उठ कर जाने को तयार होने लगी.
"अच्छा, ठीक है ये बताओ की घर कब देखने चलना है, मैं चाहता हूँ की घर की सेटिंग पहले ही हो जाये, और बस शादी करते ही हम अपने घर में जाएँ" अभिनव ने नेहा से पुछा. 
"Good idea, चलो कल चलते हैं, शुभ काम में देरी कैसी, मैं तो कहती हूँ, इसी हफ्ते में घर देख-दिखा कर पक्का कर लेते हैं, और बस फिर सामान ही ले जाना बाकी रह जायेगा" नेहा ने उत्साहित होते बोला.


- 3 -

"Miss नेहा, ये हैं  Mr. अनंत, इन्होंने आज ही ज्वाइन किया है, छः महीने के लिए ये आपके साथ काम करेंगें, इनको काम सीखना आपकी ज़िम्मेदारी होगी" अनंत का परिचय देते पारुल ने कहा.
"ओ, हेल्लो, आपका कंपनी में स्वागत है" नेहा ने अनंत से हाथ मिलाते कहा, " पहले कहीं काम किया है क्या आपने?".  
"जी, ये मेरी पहली ही नौकरी है" अनंत ने कहा. 
"अरे वाह, मुबारक हो, और मैं अपने को खुश-नसीब समझती हूँ, आशा करती हूँ मैं आपको कुछ सीखा पाऊं" नेहा ने कहा.
"सीखने वाले पर भी निर्भर करता है वो कितना सीखना चाहता है" अनंत ने मुस्कुराते हुए कहा.  
"बहुत ख़ुब, मुझे लगता है अपनी बहुत जमने वाली है" नेहा ने भी नहले पर दहला मार दिया 
दोनों मुस्कुराने लगे.

शाम को घर जाते वक़त नेहा अनंत के बारे मे ही सोचती रही, 'हम्म, सीख लेगा काम, और जल्दी ही सीख लेगा, होशियार लगता है, चलो अच्छा है, तीन महीने बाद मुझे भी छुट्टी लेनी ही है, इसे अपनी तरहं ही काम सीखा दूंगीं, और लगातार फ़ोन पर हिसाब-किताब भी होता रहेगा'.

- 4 -

"और बई, क्या हाल है नेहा जी, शादी की तैयारियां कैसी चल रही हैं?" पारुल ने लंच टेबल पर बैठते पुछा. 
"यार बहुत काम होता है, शादी है या कसरत, जब शादी का दिन आएगा, तब तक मेरे चेहरे पर बस थकान ही नज़र आएगी" नेहा ने खाना खाते बोला. 
"चल कोई न, सब ठीक हो जायेगा, शादी से दो-चार दिन पहले आराम कर लेना, चेहरा भी चमक जायेगा" पारुल ने कहा,"और बता कैसा है नया बंदा, तुझे तो बड़ी बहन वाली फीलिंग आ रही होगी?".
"बस-बस हाँ, ये बहन-भाई का रिश्ता क्यों बनाने बैठ जाते हैं सब, घर में कमी है क्या, ऐसा है, तुम्ही ले जाओ अपने डिपार्टमेंट में और बना लो भाई वहां का, ये ऑफिस है यहाँ काम करने आते है न की रिश्ते जोड़ने" नेहा ने खीजते हुए कहा.
"सही कहा, चलो बताओ, तुम जब छुट्टी पर जाओगी तो काम तो कर लेगा न, बस इतना सीखा देना की तुम्हारे पीछे से कोई दिकत न हो" पारुल ने नेहा से कहा.
"अरे, उसकी फ़िक्र मत करो, और मैं बस पन्द्रह दिन को हो जा रही हूँ, और फ़ोन पर सब हाल पूछती रहूंगीं" नेहा ने लंच बॉक्स बंद करते कहा.
 नेहा वापस अपने केबिन मे आयी अनंत वहां बैठा अपना काम कर रहा था, "ओ, मिस्टर, खाना-वाना नहीं खाना क्या, लंच ब्रेक है, जाओ एन्जॉय करो, खाना खायो, थोड़ा बहार घूम आओ".  
"वो मैं खाना खा कर आता हूँ, और फिर वापस जा कर ही खाता हूँ, मैंने सोचा जल्दी काम खत्म कर लेता हूँ, वो मुझे आज थोड़ा जल्दी जाना था, क्या मैं आधा घंटा पहले जा सकता हूँ" अनंत से नेहा से पुछा.
"क्या बात है, कहीं जाना है क्या" नेहा ने अपनी सीट पर बैठते पुछा.
"जी, मेरी एक खास दोस्त का जन्मदिन है बस वहीँ जाना है" अनंत ने कहा.
"ठीक है चले जाना जल्दी, और हाँ तीन महीने के बाद पंद्रह के लिए मैं छुट्टी पर हूँ, इसलिए बताया की तब कोई छुट्टी नहीं मिलेगी, धयान रखना" नेहा ने अनंत से कहा. 
"जी, मैं धयान रखुगा, मुबारक हो, सुना है आपकी शादी हो रही है" अनंत ने नेहा से पुछा.
"हाँ बई, सबकी शादी होती है, मेरी भी हो रही है" नेहा ने हस्ते हुए कहा.

- 5 -


"अरे ये तो अनंत है" अनंत दूर टेबल पर बैठा था. 

"कौन अनंत, कौन है अनंत" अभिनव ने नेहा से पुछा. 

"अरे, अनंत, मैंने बताया न की वो मेरे ऑफिस में नया आया है, मेरे साथ ही काम करता है" नेहा ने कहा, "पर वो यहाँ क्या कर रह है".

"जो तुम और मैं कर रहे हैं, रेस्टोरेंट में सब खाना खाने हो आते है और किस लिए आते हैं" अभिनव ने मुस्कुराते कहा.

'बड़ी देर से अकेला ही बैठा है, शायद अकेला ही आया हो, यही बुला लेती हूँ' नेहा ने सोचा और मोबाइल उठा कर अनंत का नंबर मिलाने लगी तो देखा अनंत किसीकी तरफ देख कर मुस्कुराने लगा, और अगले हो पल अनंत और कोई लड़की गले मिल रहे थे, अनंत और वो लड़की साथ-साथ बैठ गए और एक दुसरे से हंस-हंस कर बातें करने लगे. 

'ओ, तो ये है वो ख़ास दोस्त, सही है' नेहा को कुछ जलन सी होने लगी 

'अनंत, बहुत खुश नज़र आ रहा है, पर मुझे क्यों बुरा लग रहा है, मेरी शादी हो रही है अभिनव से, और अभिनव मुझसे बहुत प्यार करता है' नेहा अभिनव के कंधे पर सर रख सोचने लगी, 'पर, क्या मैं भी अभिनव से प्यार करती हूँ'!

"क्या, बोलो न, क्या हुआ" अभिनव कुछ बोल रहा था.

"क्या, मैंने क्या कहा" नेहा जैसे होश में आ गयी हो. 

"बहुत दिनों बाद मुझ पर प्यार आ रह है, ऐसे प्यार से तुमने आख़री बार कब मेरे कंधे पर सर रखा था, मुझे तो याद भी नहीं, नेहा, एक बार और पूछने दो, क्या सच में तुम मुझसे शादी करोगी न" अभिनव ने पुछा.

"ओ, अभिनव, पागल हो तुम, अब तो तुमसे ही शादी करनी होगी, और कौन करेगा मुझसे शादी" नेहा, अभिनव को देख मुस्कुराने लगी. 

अभिनव ने नेहा के माथे को चूम लिया .


                            to be continued ....

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