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मैं
मोहब्बत के वादे भूलने लगा हूँ कुछ–कुछ गर
तुम्हें याद रहे हों तो
वही याद करवाने आ
जाना मैं
अपने टुकड़े न जाने कहाँ छोड़ आया हूँ गर
तुम्हारे पास हों तो
वही लौटाने आ
जाना। बहाने
बहुत हैं तुमको
बुलाने के पर
तुम्हारा बहाना क्या
है न आने का— बस
वही बताने एक
बार तो बस आ
जाना |
'हिंदी कवितायेँ 'और कुछ 'हिंदी कहानियाँ' सपनो में गुज़र रही है ज़िन्दगी, ख्यालो में बना रखा है हमने अपना घर, दिल की बात को शब्दों की माला में पिरोते रहना, बस इतना ही बना रखा है हमने अपना दायरा, जीने के लिए बस जो ज़रूरी है उतने में ही समेट रखा है हमने अपना जहां। 'Hindi Poems' and some 'Hindi Stories'
सोमवार, 22 सितंबर 2025
भूलने लगा हूँ
मंगलवार, 9 सितंबर 2025
अजीब-सी उलझन
| एक
अजीब-सी उलझन है, क्या मैं खुद से अनजान हूँ या अनजान हैं सब मुझसे? एक अजीब-सा ख़याल है, कि मैं नाराज़ हूँ खुद से या सब नाराज़ हैं मुझसे? एक अजीब-सा एहसास है, कि मैं खुद से तन्हा हूँ या किसी की बेरुखी सबसे तन्हा कर गयी मुझे |
सोमवार, 8 सितंबर 2025
हिमाचली धाम
शिमला, हिमाचल प्रदेश के हृदय में स्थित यह रेस्टोरेंट अपने ग्राहकों को असली हिमाचली परंपरा का स्वाद चखाता है। यहाँ परोसा जाने वाला हिमाचली धाम थाली स्थानीय व्यंजनों की अनोखी झलक पेश करता है। थाली में सुगंधित चना माद्रा, पौष्टिक पहाड़ी दाल, नरम व स्वादिष्ट सिद्धू, खट्टे-मीठे स्वाद से भरपूर कद्दू की सब्ज़ी और कई अन्य पारंपरिक पकवान शामिल हैं।
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सोमवार, 1 सितंबर 2025
नादानियाँ
कुछ कच्ची उम्र
की
नादानियाँ थी
वो
अब पक्की उम्र में
लौट आयी हैं
नादानियाँ भी ऐसी
जो न
बालों की चाँदी देखती है
और न
उम्र की लकीरों का
तकाज़ा करती हैं
बस वो कच्ची उम्र वाले
लिहाफ ओढ़े
मुझे अपने में
समेटने को आती हैं
कोई जा कर कह दे
उन कच्ची उम्र की
नादानियों से
की अब हम
ज़माने को न छोड़ पायेंगें
और न ही
वो कच्ची उम्र वाला
लिहाफ ओढ़े पायेंगें
सोमवार, 25 अगस्त 2025
एक आहट सी
और
एक दिल तक जा पहुंची
सुनी - सुनाई बात पर यकीन नहीं करते
आहटों को आवाज़ नहीं समझ लिया करते
एक उम्र है मेरी
और
तुम्हारी भी, अब
इस उम्र
कुछ गलतियां नहीं करते
बस
कुछ, कहीं सुना तो था
समझ कर
कर देते है








